
वेस्टइंडीज के एक ऐसे क्रिकेटर का करियर डेब्यू टेस्ट में शतक लगाने के बाद ही समाप्त हो गया, जो क्रिकेट इतिहास में 112 के उच्चतम टेस्ट औसत के साथ दर्ज हैं।
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद इस खिलाड़ी को अपने देश के लिए दोबारा खेलने का मौका नहीं मिल सका, जो उनके करियर का सबसे बड़ा दुर्भाग्य रहा।
यह मामला उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की हकीकत बयां करता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने के बावजूद लंबे समय तक टीम में जगह नहीं बना पाते।