पंकज त्रिपाठी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि वे कभी 7 दिन जेल में रहे थे और होटल में काम करते थे।
उन्होंने मनोज बाजपेयी के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने उनकी चप्पल को एक यादगार के रूप में संभाल कर रखा था।
आज 'कालीन भैया' के नाम से मशहूर पंकज त्रिपाठी का यह सफर गांव के एक लड़के से नेशनल अवॉर्ड विजेता बनने तक की प्रेरणादायक कहानी है।