
अयोध्या के उदया पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में बताया गया कि रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन केवल कैटेगरी-3 के गहरे घाव वाले मरीजों के लिए आवश्यक है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने छात्रों को हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के लक्षणों के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया और टीबी से बचाव के उपाय समझाए।
एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि कुत्ता, बंदर या सियार के काटने पर घाव की प्रकृति के आधार पर ही उपचार का निर्णय लेना चाहिए।