इजरायल को डर है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच प्रस्तावित असैन्य परमाणु समझौता क्षेत्र में हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकता है और इजरायल को अलग-थलग कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते में सऊदी अरब के लिए यूरेनियम संवर्धन न करने या उन्नत निगरानी ढांचे में शामिल होने जैसी सख्त शर्तें शामिल नहीं की गई हैं।
ट्रंप प्रशासन द्वारा इस समझौते को इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की शर्त से अलग रखने के कारण इजरायल की क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिति कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।