
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत अस्पतालों में सेवाओं की रेट लिस्ट प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में हर साल चिकित्सा क्षेत्र की गलतियों से अनुमानित 52 लाख लोग प्रभावित होते हैं, जिसमें गलत दवा और इन्फेक्शन जैसी लापरवाहियां शामिल हैं.
नेशनल मेडिकल कमीशन के नोटिस के बाद अब सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में एक पेशेंट सेफ्टी ऑफिसर और समर्पित पेशेंट सेफ्टी कमेटी का गठन अनिवार्य किया गया है.