ईरान-अमेरिका तनाव और सऊदी अरब के संघर्ष में शामिल होने से ब्रेंट क्रूड 7.91 प्रतिशत उछलकर 90.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है, जिससे भारत में ईंधन सस्ता होने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।
अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व 1983 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर है और मिस्र में ड्रोन हमलों के कारण प्राकृतिक गैस पोतों में आग लगने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है।