कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की नेचर जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, धूम्रपान करने वाले कुछ लोगों में फेफड़ों का कैंसर न होने का कारण उनका मजबूत जन्मजात DNA रिपेयर सिस्टम है।
लगभग 600 ट्यूमर के विश्लेषण से पता चला कि जेनेटिक बनावट यह तय करती है कि शरीर सिगरेट के धुएं जैसे कार्सिनोजेन्स से होने वाले DNA नुकसान को कैसे ठीक करता है।
यह खोज भविष्य में प्रिसिजन मेडिसिन के जरिए कैंसर के जोखिम का पहले से पता लगाने और सटीक इलाज विकसित करने में क्रांतिकारी साबित हो सकती है।