
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद अमेरिका और अन्य देशों में भारी मात्रा में सस्ता तेल उपलब्ध है.
अमेरिका से एशिया तक एक बड़े टैंकर से तेल भेजने का खर्च बढ़कर 8 करोड़ डॉलर यानी करीब 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है जो साल की शुरुआत में 1 से 1.5 करोड़ डॉलर था.
रूस से तेल महंगा होने और टैरिफ के खतरे के बीच भारत वेनेजुएला, इराक और संयुक्त अरब अमीरात से सस्ता तेल आयात करने के विकल्प तलाश रहा है.