
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एजेंसी IARC ने हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड, वोरिकोनाजोल और टैक्रोलिमस को कैंसरकारी पदार्थों की 'ग्रुप 1' सूची में शामिल किया है।
हाई बीपी की दवा हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड के लंबे समय तक सेवन से त्वचा और होंठ के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि यह दवा त्वचा को पराबैंगनी किरणों के प्रति संवेदनशील बनाती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें, क्योंकि अनियंत्रित बीपी से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का गंभीर खतरा हो सकता है।