
रिसर्च के मुताबिक आईने के सामने अपने चेहरे की कमियों को बार-बार देखने से दिखावटी संतुष्टि और आत्म-सम्मान कम हो सकता है, जो बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (BDD) का रूप ले सकता है।
भारत में कॉलेज और मेडिकल छात्रों पर हुए अध्ययनों में BDD के लक्षण मिलने की दर 6.9% से लेकर 30.7% तक दर्ज की गई है।
सोशल मीडिया और फोटो-एडिटिंग ऐप्स के फिल्टर भी युवाओं में अस्वस्थ तुलना और कॉस्मेटिक सर्जरी कराने की इच्छा को तेजी से बढ़ा रहे हैं।