आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि सच्चा नेतृत्व केवल भाषण देने या चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को मजबूत करने में है।
भागवत ने स्पष्ट किया कि वे खुद को नेता नहीं बल्कि एक कार्यकर्ता मानते हैं और एक प्रभावी नेता वही है जो अपने बाद कई नए नेतृत्व तैयार कर सके।
उन्होंने 'जेन-जी' और 'अल्फा' पीढ़ी के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि संकट के समय योद्धा की तरह जिम्मेदारी निभाना ही असली लीडरशिप की पहचान है।