
UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से लगभग 22,000 करोड़ रुपये तक की आमदनी होने का अनुमान ब्रोकरेज फर्मों ने लगाया है।
लेनदेन के दौरान बनने वाले MDR शुल्क का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 40 से 80 प्रतिशत तक हिस्सा बैंकों के पास जा सकता है।
बचत खातों और UPI यूजर्स की संख्या के मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) लगभग 25% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है।