
सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स होने के बावजूद कई इन्फ्लुएंसर्स डिप्रेशन और पहचान के संकट के कारण आत्महत्या कर रहे हैं, क्योंकि उनकी पहचान और सेल्फ-वर्थ फॉलोअर्स की संख्या पर टिकी होती है.
साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, लाइक्स और एप्रिसिएशन से मिलने वाला 'हाई' कम होने पर वे और ज्यादा वैलिडेशन के पीछे भागते हैं, जिससे सेल्फ-एस्टीम और मूड पूरी तरह कंटेंट के परफॉर्मेंस पर निर्भर हो जाता है.
भारत में 4.5 करोड़ से ज्यादा क्रिएटर्स में से सिर्फ 4.5 से 6 लाख ही ठीक-ठाक कमाई कर पाते हैं, और ऑनलाइन हिंसा (साइबरबुलिंग) भी एक बड़ी वजह बन रही है.