महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे 1989 के नियमों के तहत सख्ती से लागू किया जा रहा है।
मनसे ने कांदिवली में चेतावनी बोर्ड लगाए हैं कि यदि चालकों को मराठी बोलने में परेशानी है, तो वे महाराष्ट्र छोड़कर अपने राज्यों में वापस जा सकते हैं।
परिवहन विभाग के अभियान के तहत 1,65,601 गैर-मराठी भाषी चालकों ने अब तक मराठी भाषा सीखने के लिए पंजीकरण कराया है।