
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में कहा कि सृष्टि की शुरुआत से अंत तक धर्म बना रहता है और इसे बुढ़ापे या रिटायरमेंट की चीज नहीं मानना चाहिए.
उन्होंने युवाओं के धर्म संसद कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि आजकल युवा धर्म पर कम बात करते हैं, जबकि पश्चिमी जगत ने 'रिलिजन' को धर्म समझकर गलती की है.
भागवत ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति को अहंकार छोड़कर यह समझना चाहिए कि सब कुछ उसकी इच्छा से नहीं बल्कि तय नियमों और व्यवस्था के अनुसार चलता है।