
लोकसभा के बाद मंगलवार 4 अगस्त को राज्यसभा ने भी 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक' को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी है।
इस संशोधन के तहत एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट या एसडीएम की मंजूरी अनिवार्य होगी, जबकि दो साल से अधिक देरी पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 की धारा 13 (3) में बदलाव कर देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन के प्रावधानों को सख्त बनाना है।