द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी सेना यूक्रेन के सैनिकों और नागरिकों को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए यौन हिंसा और टॉर्चर को एक सोचे-समझे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र की जांच में 310 मामलों में से 280 पीड़ित पुरुष पाए गए हैं, जिन्हें जेलों में बिजली के झटके देने और सामूहिक बलात्कार जैसी अमानवीय प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है।
पूर्व युद्धबंदियों ने बताया कि रूसी गार्ड्स इन कृत्यों को 'कॉल टू पुतिन' कहते थे, जबकि क्रेमलिन ने इन संगीन आरोपों पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।