
विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद के बजाय 'जलवायु मुआवजे' की मांग की है, क्योंकि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उसका योगदान बेहद कम है।
नेपाल का तर्क है कि हिमालयी देशों को ग्लेशियर पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं का सबसे गंभीर असर झेलना पड़ रहा है, जिसके लिए उसे मुआवजा मिलना चाहिए।
नेपाल ने इस मुद्दे पर भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों की ओर इशारा करते हुए वैश्विक उत्सर्जन के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन के लिए अपनी चिंता जताई है।