
हिंदू धर्म में परिवार में किसी की मृत्यु के बाद सूतक या अशौच काल के दौरान घर में तड़के वाला भोजन बनाने की मनाही है।
यह परंपरा गरुड़ पुराण में वर्णित संस्कारों और नियमों का हिस्सा है, जिसका पालन शोक की अवधि के दौरान खान-पान में सादगी बनाए रखने के लिए किया जाता है।
मृत्यु के बाद के इन नियमों का उद्देश्य परिवार को शोक की स्थिति में संयमित रखना और धार्मिक शुद्धता का पालन सुनिश्चित करना है।