
लंबे समय तक धूप, गर्मी और मौसम के बदलाव का सामना करने के कारण सोलर पैनल की बिजली बनाने की क्षमता में हर साल औसतन 0.5 प्रतिशत की गिरावट आती है।
लगातार धूप और तापमान घटने-बढ़ने से थर्मल स्ट्रेस के कारण पैनल के अंदर माइक्रो-क्रैक्स बन जाते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनों का मार्ग प्रभावित होता है।
इसके अलावा पुराने पी-टाइप पैनलों में लाइट-इंड्यूस्ड डिग्रेडेशन यानी एलआईडी और पैनल की सतह पर धूल व गंदगी जमने से भी बिजली उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।