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कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति अपनी पत्नी को घर के काम या सास-ससुर की सेवा के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी किसी महिला की आजादी को नियंत्रित करने का लाइसेंस नहीं देती है और यह पत्नी की मर्जी पर निर्भर करता है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि कोई भी पुरुष अपनी पत्नी को माता-पिता की देखभाल करने का आदेश देने का कानूनी अधिकार नहीं रखता है।