
वॉशिंग मशीन के अंदर ठंडे पानी में कपड़े धोने से बैक्टीरिया और शरीर का तेल पूरी तरह खत्म नहीं हो पाते, जिससे वहां 'बायोफिल्म' नाम की एक चिपचिपी परत जम जाती है।
साइंटिफिक स्टडीज के मुताबिक, ये माइक्रोऑर्गैनिज्म कपड़ों और डिटर्जेंट के अंशों को तोड़कर सल्फर और फैटी एसिड छोड़ते हैं, जिससे कपड़ों में सीलन या खट्टी गंध पैदा होती है।
इस समस्या से बचने के लिए विशेषज्ञ हर धुलाई के बाद मशीन का दरवाजा खुला छोड़ने और महीने में कम से कम एक बार 60 डिग्री तापमान पर ब्लीच के साथ मशीन चलाने की सलाह देते हैं।