
पारंपरिक बुलिंग से पीड़ित बच्चे अक्सर स्कूल जाने से कतराते हैं, अचानक गुमसुम रहते हैं या उनके ग्रेड्स में गिरावट आने लगती है।
डिजिटल दौर में साइबर बुलिंग के शिकार बच्चे स्मार्टफोन पर नोटिफिकेशन आने पर सहम जाते हैं या अचानक स्क्रीन छिपाने की कोशिश करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार माता-पिता को ऐसे बच्चों के लिए एक सुरक्षित माहौल देना चाहिए ताकि वे बिना डरे अपनी परेशानी साझा कर सकें।