
डॉ. नवीन पोलावरपु के अनुसार, खराब गट हेल्थ केवल पाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मेटाबॉलिक, इंफ्लेमेटरी और मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
आंतों में सूजन और बैक्टीरिया का असंतुलन मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और किडनी की कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
गट माइक्रोबियल असंतुलन मूड स्विंग्स, सोचने की क्षमता में कमी और अनिद्रा जैसी मानसिक समस्याओं से भी जुड़ा है, जिसे सही खान-पान और जीवनशैली से सुधारा जा सकता है।