
सुप्रीम कोर्ट ने 1981 के एक दोहरे हत्याकांड मामले में 45 साल की न्यायिक देरी को व्यवस्था की विफलता बताते हुए एकमात्र जीवित दोषी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
इस मामले में निचली अदालत और झारखंड हाई कोर्ट दोनों को सुनवाई पूरी करने में 22-22 साल का लंबा समय लगा, जिसके दौरान छह में से पांच आरोपियों की मौत हो गई।
70 साल से अधिक उम्र का एकमात्र जीवित दोषी, जो वर्तमान में बिस्तर पर है, जेल से ही अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहा था जिसे अब शीर्ष अदालत ने बड़ी राहत दी है।