भारत ने सोमवार को सिंधु जल संधि विवाद पर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय यथावत लागू रहेगा और कोर्ट का आदेश इसे प्रभावित नहीं करेगा।
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इसहाक डार ने इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर बताते हुए कहा कि संधि का एकतरफा निलंबन अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय संबंधों के लिए चिंताजनक है।