
यमन का मोखा बंदरगाह, जिसने कभी 17वीं सदी में दुनिया को 'मोचा कॉफी' का स्वाद दिया था, आज युद्ध और बदहाली की स्थिति से जूझ रहा है।
लाल सागर के तट पर स्थित इस बंदरगाह से यूरोपीय कंपनियां बड़ी मात्रा में कॉफी की फलियों का व्यापार करती थीं और शहर का नाम ही इस पेय की पहचान बन गया था।
हालांकि कॉफी के पौधे समय के साथ दूसरे देशों तक पहुंच गए, जिसके बाद विद्रोहियों और वैश्विक संघर्षों ने इस ऐतिहासिक बंदरगाह को वीरान कर दिया।