सबा पटौदी ने बताया कि उनकी मां शर्मिला टैगोर ने मंसूर अली खान पटौदी से शादी के बाद इस्लाम अपनाया और बच्चों को इसी माहौल में पाला।
सबा ने स्पष्ट किया कि उनके माता-पिता ने उन पर या उनके भाई-बहनों सैफ और सोहा पर कोई धर्म नहीं थोपा और उन्हें अपनी पसंद चुनने की आजादी दी।
परिवार में दिवाली, होली और क्रिसमस जैसे सभी त्योहार मनाए जाते थे, जिससे बच्चों को विभिन्न धर्मों के प्रति सम्मान की सीख मिली।