
प्रद्युम्न त्रिवेदी के अनुसार, कविता केवल शब्द नहीं बल्कि भावों की अभिव्यक्ति है जो जीवन में सकारात्मकता लाती है।
लेखक का मानना है कि जो हम सोचते हैं और लिखते हैं, वह हमारे विचारों का प्रतिबिंब होता है।
जीवन के अभावों को समझने और उन्हें शब्दों में पिरोने से ही वास्तविक कविता का जन्म होता है।