
उत्तराखंड के चमोली और उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी जिलों में भालू के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने और हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर महीने में हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) में जाने से पहले भालू अपने शरीर की चर्बी बढ़ाने के लिए जंगल से निकलकर आबादी के आसपास भोजन की तलाश में पहुंचते हैं।
वन मुख्यालय ने वनाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, कैमरा ट्रैप लगाने और जिला प्रशासन के सहयोग से कूड़े के ढेरों की सफाई कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।