एक महिला ने आरोप लगाया कि एक मेडिकल कैंप में जबरदस्ती मैमोग्राफी करने पर उसे थर्ड स्टेज ब्रेस्ट कैंसर बताया गया, जबकि बाद में जांच में कोई गांठ नहीं मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, मैमोग्राम एक लो-डोज एक्स-रे है जो शुरुआती कैंसर का पता लगाने में प्रभावी है, लेकिन इसे केवल प्रतिष्ठित अस्पतालों में ही करवाना चाहिए।
मायोक्लीनिक के अनुसार, गांठ के बिना भी कैंसर हो सकता है, लेकिन कैंपों में होने वाली ऐसी जांचों में गलत रिपोर्ट मिलने का जोखिम अधिक रहता है।