डॉ. निधि शर्मा चौहान के अनुसार, 50 से 80 फीसदी महिलाओं में PCOS के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होती है, जो टाइप 2 डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाती है।
WHO PCOS को एक मेटाबोलिक स्थिति मानता है, जिसका असर फर्टिलिटी के अलावा डिप्रेशन, एंग्जायटी और बॉडी इमेज जैसे मानसिक स्वास्थ्य पहलुओं पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दवा के बजाय हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन जैसे होलिस्टिक नजरिए से ही इस स्थिति को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।