
डॉ. विवेक एस. अग्रवाल के अनुसार, भारत की मात्र 10 प्रतिशत आबादी अंग्रेजी भाषी है, फिर भी शिक्षा और सरकारी कामकाज में अंग्रेजी को मातृभाषाओं से अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
चीन, जापान और रूस जैसे देशों ने अपनी मातृभाषा में शिक्षा और विकास को अपनाकर प्रगति की है, जबकि भारत अभी भी औपनिवेशिक विरासत के प्रभाव से बाहर नहीं निकल पाया है।
देश के जिला न्यायालयों में 51 लाख, उच्च न्यायालयों में 65 लाख और सर्वोच्च न्यायालय में 93,000 मामले लंबित हैं, जहां अंग्रेजी का वर्चस्व और औपनिवेशिक प्रोटोकॉल न्याय प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।