जून 2026 से लागू FCRA नियमों के तहत विदेशी फंड चाहने वाले NGOs को अब सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और धार्मिक श्रेणियों में से केवल एक के अंतर्गत पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
संशोधित नियमों के अनुसार, जिन NGOs के प्रमुख पदाधिकारियों में विदेशी नागरिक शामिल हैं, उन्हें केंद्र सरकार की विशेष अनुमति के बिना पंजीकरण नहीं मिलेगा।
सरकार का तर्क है कि ये कड़े प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे छोटी संस्थाओं पर बुरा असर पड़ेगा।