गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा एन्क्रिप्शन सिस्टम को तोड़ सकते हैं, जिससे ऑनलाइन बैंकिंग और आधार जैसे संवेदनशील डेटा खतरे में पड़ सकते हैं।
डेलॉयट इंडिया के मुताबिक, भारत की केवल 10-15% कंपनियां ही इस खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं, जबकि 25-30% अभी शुरुआती जांच के चरण में हैं।
सरकार ने 2027 तक पायलट प्रोजेक्ट्स और 2029 तक पूरी तरह सुरक्षित क्वांटम-प्रूफ प्रणाली लागू करने का लक्ष्य रखा है ताकि महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे को बचाया जा सके।