सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को असंवैधानिक घोषित करने और इसके स्थान पर लीथल इंजेक्शन जैसे मानवीय तरीकों को अपनाने की याचिका को खारिज कर दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट किया कि CrPC की धारा 354(5) और BNSS की धारा 393(5) के तहत फांसी की व्यवस्था फिलहाल वैध रहेगी।
अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार भविष्य में फॉरेंसिक और न्यूरोसाइंस विशेषज्ञों की समिति बनाकर फांसी के विकल्पों पर वैज्ञानिक समीक्षा करने के लिए स्वतंत्र है।