
जीवन की सांध्य बेला को पतझड़ और ढलते सूरज के रूप में वर्णित किया गया है, जो जीवन के अंतिम मोड़ और सत्य को स्वीकार करने का प्रतीक है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह समय जीवन के अनुभवों के संचय और मोह-माया से मुक्ति का संकेत देता है, जहां राही अपनी यात्रा के अंत पर ठहरा हुआ है।
यह विश्लेषण मृत्यु के अटल सत्य को स्वीकार करने और जीवन को भरपूर जीने के बाद किसी भी प्रकार के शोर या पछतावे से दूर रहने का संदेश देता है।