
रोहतक पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक में हर महीने प्रीकोशियस प्यूबर्टी के करीब 6 नए मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या अधिक है।
अस्पताल में फिलहाल 40 बच्चे हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन ले रहे हैं, जबकि 2019 में ऐसे मामलों की संख्या केवल 2 से 3 प्रति माह थी।
डॉक्टरों के अनुसार, मोटापा, जंक फूड का सेवन और स्क्रीन टाइम का बढ़ना इसके मुख्य कारण हैं, जो बच्चों की शारीरिक लंबाई पर भी नकारात्मक असर डाल रहे हैं।