
यूरोपीय रेस्पिरेटरी जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, लॉन्ग कोविड से पीड़ित मरीजों के मुंह और फेफड़ों के बैक्टीरिया में सामान्य लोगों की तुलना में बड़े बदलाव देखे गए हैं।
ब्रिटेन के 38 अस्पतालों के 771 मरीजों पर की गई इस स्टडी में पाया गया कि गंभीर लक्षणों वाले मरीजों के फेफड़ों में लैक्टिक एसिड बनाने वाले बैक्टीरिया अत्यधिक बढ़ गए थे।
वैज्ञानिकों का मानना है कि फेफड़ों के माइक्रोबायोम में यह असंतुलन ब्रेन फॉग और पाचन समस्याओं जैसी गंभीर शारीरिक परेशानियों का कारण बन सकता है।