
उत्तर प्रदेश में हालिया हत्याओं के मामलों में कानून-व्यवस्था के साथ मृतक की जाति सामने आने से राजनीतिक नैरेटिव और वोट बैंक की सियासत तेज हो गई है।
अंकित बालियान की हत्या पर जाट आक्रोश और गोंडा में विनोद साहनी की मौत के बाद निषाद बनाम ऊंची जाति का राजनीतिक नैरेटिव चर्चा में आ गया है।
गोरखपुर में ठेकेदार शिवकुमार त्रिपाठी की हत्या को ब्राह्मण सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि 2027 के चुनाव से पहले सभी दल इन वोट बैंक को साधना चाहते हैं।