पाकिस्तान के नूर खान और मसरूर एयरबेस पर 60 घंटे के भीतर चीन और तुर्की के भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमानों की असामान्य आवाजाही दर्ज होने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं.
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार इस सघन हवाई ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान को चीन और तुर्की से आधुनिक ड्रोन (UAVs) और अन्य सैन्य साजो-सामान की बड़ी खेप सौंपे जाने का अंदेशा है.
यह सैन्य हलचल 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते और तुर्की के 'KAAN' फाइटर जेट प्रोजेक्ट में 200 पाकिस्तानी इंजीनियरों के शामिल होने के बीच हुई है.