
रूस में एंटी-प्लेग लैब में काम करने वाली 28 साल की डार्या शिपिलोवा की निमोनिया से मौत के बाद प्लेग पर चर्चा शुरू हुई है।
प्लेग कोई वायरस नहीं बल्कि 'येरसिनिया पेस्टिस' नामक बैक्टीरिया से फैलने वाली गंभीर बीमारी है।
वर्ष 2018 की एक स्टडी में सामने आया कि मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले अमीबा के अंदर प्लेग के बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं।