
सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की एक दवा के रिटेल मूल्य (2700 रुपये) और एमआरपी (27000 रुपये) में दस गुना अंतर पर कड़ी नाराजगी जताई है।
अदालत ने पूछा कि जब जीवनरक्षक दवाओं की कीमत इतनी ज्यादा हो सकती है तो कीमतों पर नियंत्रण की व्यवस्था क्यों नहीं है।
मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी, जहां दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था और जेनेरिक दवाओं पर चर्चा होगी।