
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, IVF की विफलता के पीछे महिला की उम्र, एम्ब्रियो की जेनेटिक गुणवत्ता, हार्मोनल असंतुलन और पुरुष स्पर्म की खराब क्वालिटी जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं में अंडों की संख्या और गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आती है, जिससे क्रोमोसोम संबंधी दोष और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
बार-बार IVF फेल होने पर पार्टनर्स को Sperm DNA Fragmentation, Karyotyping या जेनेटिक टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है ताकि सही कारणों का पता लगाकर दोबारा इलाज शुरू हो सके।