
भारत में करीब 80 लाख लोग एट्रियल फिब्रिलेशन से पीड़ित हैं, जो दिल की धड़कन अनियमित होने की एक गंभीर समस्या है।
यह बीमारी स्ट्रोक के खतरे को पांच गुना तक बढ़ा देती है, लेकिन कई लोगों में इसके लक्षण नहीं दिखते, जिसे 'साइलेंट एट्रियल फिब्रिलेशन' कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड थिनर दवाओं के समय पर उपयोग से इस समस्या से होने वाले 70 फीसदी स्ट्रोक को रोका जा सकता है।