
कलर ब्लाइंडनेस आमतौर पर जेनेटिक होती है, लेकिन मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, डायबिटीज और ऑप्टिक नर्व की समस्याओं के कारण भी रंगों को पहचानने में दिक्कत हो सकती है।
डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में अधिक होती है और इसकी जांच के लिए इशीहारा कलर टेस्ट का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है।
जन्मजात कलर ब्लाइंडनेस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन विशेष चश्मों और विजुअल एड्स के जरिए रंगों के अंतर को समझने में मदद मिल सकती है।