
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के प्रति आकर्षण को डांटने या पाबंदियां लगाने के बजाय उनसे खुलकर बात करना अधिक प्रभावी है।
बच्चों को रिश्तों में सम्मान, सहमति और निजी सीमाओं के साथ-साथ पढ़ाई व डेली रूटीन के संतुलन की अहमियत समझाना जरूरी है।
यदि बच्चा लगातार परेशान रहे या व्यवहार में बड़े बदलाव दिखें, तो स्कूल काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना उचित होता है।