सत्य निकेतन त्रासदी के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की कमी का मुद्दा फिर से गरमा गया है, जहां हर 34 छात्रों में से केवल 1 को कैंपस में जगह मिलती है।
हॉस्टल की भारी कमी के कारण छात्र असुरक्षित पीजी और निजी कमरों में रहने को मजबूर हैं, जो हालिया हादसों का मुख्य कारण बना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर हॉस्टल क्षमता बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है ताकि छात्रों को सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके।