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सर्वाइकल कैंसर की पहचान में कोल्पोस्कोपी टेस्ट की भूमिका

सर्वाइकल कैंसर की पहचान में कोल्पोस्कोपी टेस्ट की भूमिका

Navbharat Times2h
THE BRIEF
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सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए कोल्पोस्कोपी एक महत्वपूर्ण जांच है, जिसमें मैग्नीफाइंग डिवाइस की मदद से गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) की विस्तृत जांच की जाती है।

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डॉक्टर आमतौर पर तब कोल्पोस्कोपी की सलाह देते हैं जब पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट के परिणाम असामान्य आते हैं या शारीरिक संबंध के बाद असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखते हैं।

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यह प्रक्रिया कैंसर की पुष्टि नहीं है, बल्कि संदिग्ध टिशू का बायोप्सी सैंपल लेने की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे समय रहते कैंसर के बदलावों को रोका जा सकता है।