
आगरा में कीट विशेषज्ञों के अनुसार, क्यूलेक्स और एडीज एजिप्टाई जैसे मच्छरों ने ट्रांस फ्लूथ्रिन जैसे कीटनाशकों के खिलाफ एस्टरेज जैसे डिटॉक्स एंजाइम विकसित कर लिए हैं।
मच्छरों ने अपने व्यवहार में बदलाव करते हुए अब रोशनी के बजाय अंधेरे में छिपना शुरू कर दिया है और उनकी बाहरी परत (क्यूटिकल) भी मोटी हो गई है।
डॉ. गिरीश माहेश्वरी ने बताया कि लंबे समय तक रसायनों के उपयोग से मच्छरों के जीनोम में जेनेटिक बदलाव हुए हैं, जिससे वे अब कीटनाशक छिड़काव के बाद भी पूरी तरह नहीं मर रहे हैं।